भोपाल -साल 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान सामाजिक सरोकारों के साथ शुरू हुई न्यूज़ मोहल्ला वेलफेयर फाउंडेशन की गतिविधियां लगातार समाज के जरूरतमंद लोगों तक पहुंचती रही हैं। इसी सामाजिक सोच को आगे बढ़ाते हुए न्यूज़ मोहल्ला के संस्थापक फ़ैज़ुद्दीन ख़ान ने एक ऐसे वर्ग की ओर ध्यान दिया, जिसकी आर्थिक परेशानियां अक्सर चर्चा से बाहर रह जाती हैं।
फ़ैज़ुद्दीन ख़ान ने इमाम, मुअज्जिन और मदरसों से पढ़े युवाओं के रोजगार को लेकर एक मुहिम शुरू की। उनका कहना था कि मस्जिदों में दीनी सेवाएं देने वाले कई इमाम और मुअज्जिन सीमित आमदनी में अपना परिवार चलाते हैं, जबकि मदरसों से पढ़े युवाओं के सामने रोजगार के अवसर भी सीमित रहते हैं। इसी सोच के साथ एक वीडियो संदेश के जरिए लोगों से इस मुहिम से जुड़ने और इस वर्ग के लिए काम करने की अपील की गई।
एक अपील से शुरू हुआ सफर
इस पहल में सबसे पहले मौलवी मारूफ इमरान-उज़-ज़मा जुड़े। इसके बाद धीरे-धीरे कई लोग इस मुहिम का हिस्सा बनते गए। इनमें हसीबं खान, मुदस्सर ख़ान, रहमानुद्दीन, फ़राज़ ख़ान, उमर ख़ान, असी ख़ान, गुलरेज़ ख़ान, ज़ोएब अंसारी, ख़ालिद भाई, हकीम अब्बास, नाज़िश ख़ान, बिलाल उद्दीन, मेराज अंबर , आदिल जमील, आज़म अली सिरोंज, मुदस्सर नियाज़ी, याकूब ख़ान, मुदस्सर ख़ान आकाश, मौलाना सालिक अली, सैय्यद इरफ़ान , फरहान मोहम्मद खान और साहिल ख़ान सहित कई लोगों ने मिलकर इस काम को आगे बढ़ाया।
पहले कारोबार से जोड़ा, फिर हुनर सिखाने की ओर बढ़े कदम
मुहिम के शुरुआती दौर में 27 इमाम और मुअज्जिन को छोटे कारोबार से जोड़ने का काम किया गया। किसी को कपड़ों की दुकान, किसी को किराना, कॉस्मेटिक, टेलरिंग और अन्य छोटे कारोबार शुरू करवाए गए। लेडीज़ और जेंट्स टेलरिंग जैसे कामों के जरिए भी लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की गई।
लेकिन टीम ने यहीं रुकने के बजाय आगे की दिशा पर विचार किया। सवाल था-अगर किसी व्यक्ति को कारोबार शुरू कराने के बजाय कोई ऐसा हुनर सिखाया जाए, जिससे वह लंबे समय तक अपनी आमदनी खुद पैदा कर सके तो?
इसी सोच ने मुहिम को रोजगार से आगे बढ़ाकर कौशल प्रशिक्षण की दिशा में पहुंचाया।
फ्रिज, वॉशिंग मशीन और माइक्रोवेव रिपेयरिंग की ट्रेनिंग
फाउंडेशन की टीम की मुलाकात ट्रेनर मुस्तजाब से हुई। बातचीत के बाद इमाम और मुअज्जिन के लिए फ्रिज, वॉशिंग मशीन और माइक्रोवेव रिपेयरिंग की ट्रेनिंग शुरू की गई। इस प्रशिक्षण के माध्यम से 24 लोगों को तकनीकी हुनर से जोड़ा गया।
इसके बाद मोहम्मद ज़ुबेर से मुलाकात हुई और सीसीटीवी कैमरा इंस्टॉलेशन एवं संबंधित तकनीकी कार्य की ट्रेनिंग शुरू की गई। मोहम्मद ज़ुबेर और मोहम्मद ज़ोएब ने मिलकर इस प्रशिक्षण को अंजाम दिया, जिसमें 40 लोगों को सीसीटीवी कैमरे का प्रशिक्षण दिया गया।
इस तरह कारोबार और प्रशिक्षण को मिलाकर लगभग 75 लोगों को रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।
मेज़बान बैंक्विट हॉल में हुआ सम्मान और टूलकिट वितरण कार्यक्रम
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद भोपाल के मेज़बान बैंक्विट हॉल में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भोपाल शहर क़ाज़ी सैय्यद मुश्ताक अली नदवी, मौलाना अली क़दर नायक, डॉ. आमिर फैसल, Ministry of AYUSH (Government of India), Madhya Pradesh Chief In-charge, तस्नीम हबीब साहब, Advisor एवं Former Chief Scientist & Executive Director, MPCST, सत्यम्ब जैन/मोहम्मद सईद ख़ान, Guest Faculty, State Academy of Administration, Bhopal तथा मस्जिद कमेटी के सेक्रेटरी सैय्यद ओवैस अली सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान 48 प्रशिक्षित लोगों को टूलकिट वितरित की गईं, जिनमें सीसीटीवी कैमरा तथा फ्रिज-वॉशिंग मशीन रिपेयरिंग से संबंधित टूलकिट शामिल थीं।
इसी कार्यक्रम में दो लोगों को अपना कारोबार शुरू करने में भी सहयोग दिया गया, जिनमें एक को खिलौना/खिलाना स्टोर और दूसरे को टेलरिंग की दुकान शुरू कराने में मदद की गई।
बिना बड़े प्रचार के तैयार हुआ 8 महीने का पायलट प्रोजेक्ट
इस पूरी पहल की एक खास बात यह रही कि फाउंडेशन ने शुरुआती दौर में इसका कोई बड़ा प्रचार-प्रसार नहीं किया। टीम ने पहले जमीन पर काम किया, लोगों को जोड़ा, छोटी-छोटी फंडिंग के जरिए राशि जुटाई और जरूरत के मुताबिक कारोबार या प्रशिक्षण के लिए पैसा उपलब्ध कराया।
इसका पूरा मॉडल सरल रखा गया—एक समूह बनाया गया, लोग अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करते रहे और जब किसी व्यक्ति को प्रशिक्षण या कारोबार के लिए निर्धारित राशि की जरूरत हुई, तो फंड जुटाकर उसे उपलब्ध कराया गया।
आठ महीने के इस पायलट प्रोजेक्ट में लगभग 75 लोगों को रोजगार और हुनर से जोड़ना इसी सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
अब लक्ष्य सिर्फ भोपाल नहीं, पूरा मध्य प्रदेश
न्यूज़ मोहल्ला वेलफेयर फाउंडेशन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह अभी शुरुआत है। आने वाले समय में इस मॉडल को मध्य प्रदेश के दूसरे जिलों तक ले जाने की तैयारी है।
इसी क्रम में विदिशा जिले के सिरोंज में एक टीम तैयार की जा रही है, जहां इमाम, मुअज्जिन और मदरसों से जुड़े लोगों को रोजगार, स्वरोजगार और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने का काम शुरू किया जाएगा।
टीम का अगला लक्ष्य 300 से 400 लोगों को कारोबार और रोजगार से जोड़ना है।
फाउंडेशन से जुड़े लोगों का कहना है कि,
“अभी सिर्फ सफर का इरादा किया है, सफर शुरू हुआ है। आगे देखिए, हम किस तरह से काम करते हैं।”
यह पहल इस बात का उदाहरण है कि अगर समाज के लोग छोटे-छोटे योगदान के साथ किसी उद्देश्य के लिए एकजुट हों, तो सीमित संसाधनों में भी बड़े बदलाव की शुरुआत की जा सकती है।
दीनी खिदमत के साथ सम्मानजनक रोजगार, हुनर और आत्मनिर्भरता की यह मुहिम अब भोपाल से निकलकर मध्य प्रदेश के दूसरे जिलों की ओर बढ़ने की तैयारी में है।